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जैसा कि, सत्त विकास के लिए 2030 एजेंडा के लक्ष्य 4 (एसडीजी 4) में परिलक्षित वैश्विक शिक्षा विकास एजेंडा के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी संरेखित है, सीसीआरटी ने हमेशा ऐसी शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया है जो भारतीय लोकाचार की जड़ों तक पहुँचती है । कला शिक्षा का प्रचार करने और शिक्षण में कला के महत्त्व को समझने के लिए देश के सभी भागों में सेवा कालीन शिक्षकों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करता है ।

“सांस्कृतिक जागरूकता और अभिव्यक्ति बच्चों में विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली प्रमुख दक्षताओं में से एक है, ताकि उन्हें पहचान, अपनेपन के साथ-साथ अन्य संस्कृतियों और पहचान की सराहना प्रदान की जा सके ।

अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर देने के एक भाग के रूप में, कला-एकीकृत शिक्षा को न केवल आनंददायक कक्षाओं के निर्माण के लिए, बल्कि हर स्तर पर शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में भारतीय कला और संस्कृति के एकीकरण के माध्यम से भारतीय लोकाचार को आत्मसात करने के लिए कक्षा लेनदेन में भी शामिल किया जाएगा । यह कला-एकीकृत दृष्टिकोण शिक्षा और संस्कृति के बीच संबंधों को मजबूत करेगा ।“

-राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020

सीसीआरटी ने भाग लेने वाले शिक्षकों/छात्रों को भारत की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत के समृद्ध ताने-बाने से परिचित कराने, देश के सभी हिस्सों की विविध संस्कृति, जागरूकता और परंपराओं के संरक्षण और विकास में मदद करने के लिए ‘विषयगत कार्यशालाएं और पुनश्चर्या पाठ्यक्रम’ तैयार किया है । कार्यशालाओं द्वारा छात्रों/छात्राओं में यह विश्वास पैदा किया जाता है कि उनमें प्रत्येक में कला क्षमता मौजूद है, उन्हें अपनी कला क्षमताओं को विकसित करने का अवसर प्रदान किया जाता है, साथ ही संकाय आधारित कक्षा की पढ़ाई से भी परिचित कराया जाता है उन्हें अनुशासन आधारित कला शिक्षा से परिचित कराया जाता है और ऐसी रचनात्मक गतिविधियों में संलिप्त किया जाता है, जिन्हें वे सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं । इन कार्यशालाओं के माध्यम से शिक्षकों को पाठ्यक्रम-शिक्षण में सांस्कृतिक तत्त्वों की प्रविधियाँ और पाठ्यक्रम में कलाओं का समावेश करने में भी सहायता मिलती है ।

सीसीआरटी द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं का विवरण नीचे दिया गया हैः-
शिक्षा में पुतली कला की भूमिका
प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में विद्यालयों की भूमिका
स्कूली शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश
विद्यालयी शिक्षा में संग्रहालयों की भूमिका
अन्य कार्यशालाएँ

मुख्य गतिविधियाँः
शिल्पकलाओं को सीखना
परियोजना का चयन एवं उन्हें पूरा करना
शैक्षिक सहायक सामग्री तैयार करना
राष्ट्रीय भाषाओं के गीत सीखना
भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय नृत्य पर व्याख्यान और प्रत्यक्ष प्रस्तुति – आजादी का अमृत महोत्सव का आयोजन
राजभाषा नीति और उसकी संवैधानिक स्थिति – आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए
प्रश्नोत्तरी, शैक्षिक खेल एवं स्लाइड प्रदर्शन
शैक्षिक भ्रमण
स्थानीय विद्यालयी छात्रों से बातचीत
मूल्यांकन एवं फीडबैक फॉर्म
एक भारत – श्रेष्ठ भारत के तहत क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ




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