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सी.सी.आर.टी. द्वारा प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम
 
 

समेकित शिक्षा प्रतिभावन छात्रें के लिए एक ऐसा साधन है जिसके माध्यम से वे अपनी बुनियाद एवं क्षेत्र-विशेष में गौरव व आत्म-विश्वास प्राप्त करते हैं। यदि संस्कृति, इतिहास एवं भिन्न समूहों के ज्ञान का प्रदर्शन सही रूप में किया जाए तो छात्रें में सकारात्मक सोच का विकास होगा। उन शिक्षकों/शिक्षिकाओं, जिन्हें अनुस्थापन पाठ्यक्रम अथवा शिक्षा के लिए पुतली कला पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दिया गया था, से प्रतिपुष्टि प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से पुनश्चर्या पाठ्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के मुख्य उद्देश्य

  • स्कूल में प्रशिक्षण के कार्यान्वयन के संबंध में प्रतिपुष्टि प्राप्त करना

  • शिक्षा के प्रति समग्र दृष्टिकोण के संबंध में प्राविधियाँ अभिकल्पित करना

  • पारंपरिक कलाकारों/विद्वानों तथा शिक्षाविदों के साथ संवाद स्थापित करना

  • शिक्षा के संबंध में नवाचारी विचारों का आदान-प्रदान एवं पुतलीकला के क्षेत्र में समकालीन परिदृश्य पर चर्चा करना

  • विविध शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए एवं पुतलीकला के शैक्षिक उपयोग हेतु परियोजनाएँ/कार्यसूची तैयार करना

 

 
 

अवधि :

 

5 दिन

प्रतिभागियों का स्‍तर :

 

सीसीआरटी द्वारा पूर्व में अनुस्‍थापन पाठ्यक्रम अथवा शिक्षा में पुतलीकला की भूमिका विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्रशिक्षित सेवारत शिक्षक/शिक्षिकाएं ।

कार्यक्रम स्‍थल :

 

भारत में कहीं भी

सीसीआरटी ३-४ वर्ष के अन्‍दर पूर्व में प्रशिक्षित शिक्षक/शिक्षिकाओं को उनसे प्राप्‍त मूल्‍यांकन रिपोर्ट/प्रतिपुष्टि (फीडबैक) के आधार पर इस पाठ्यक्रम में भाग लेने हेतु आमंत्रित करता हैा। अत: इस पाठ्यक्रम हेतु कोई फार्म (प्रपत्र ) नहीं है।