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सांस्‍कृतिक क्‍लब

भारतीय संस्कृति की समृद्धता एवं विविधता, इसकी 10,000 वर्ष पूर्व की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक निरन्तरता, एवं असंख्य अभिव्यक्तियों को बचाये रखने की परम आवश्यकता है।

सीसीआरटी का प्रमुख ध्येय भारतीय सांस्कृतिक विरासत का विकास, संरक्षण एवं शैक्षिक प्रचार-प्रसार करना है। इस ध्येय को ध्यान में रखते हुए सीसीआरटी ने विद्यालयों में सांस्कृतिक क्लब की स्थापना करने का कार्य शुरू किया है।

सांस्कृतिक क्लब ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा विद्यार्थी स्वयं को भारत की सांस्कृतिक धरोहर के बारे में और अधिक जानकारी के लिये संगठित कर सकते हैं।

शिक्षकों के लिये यह भारतीय कलाओं के प्रति उन्हें जागृत कर उनमें इनके लिये सम्मान एवं सराहना उत्पन्न करने का एक माध्यम है। साथ ही इसमें विद्यार्थियों को कार्य योजनाओं द्वारा भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं के संरक्षण के लिये प्रेरित करना भी निहित है ।

सीसीआरटी प्रारम्भ में एक शैक्षिक सत्र (वित्तीय वर्ष 01 अप्रैल से 31 मार्च) हेतु रुपये 5000/-की वित्तीय सहायता विद्यालय को उपलब्ध करायेगी।

विद्यालय में सांस्कृतिक क्लब की योजना के कार्यान्वयन के सन्दर्भ में गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट भेजना आवश्यक है।

वर्षों से विविध सांस्कृतिक क्लबों की रिपोर्टों को देखते हुए ऐसा लगा कि छात्र उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं जिसे केन्द्र की वेबसाइट पर डालना चाहिए । यह अन्य स्कूलों के लिए भारतीय संस्कृति से सम्बंधित विचारों के आदान.प्रदान तथा अन्तर्संबंध स्थापित करने हेतु एक आधार स्वरूप कार्य करेगा । इसे ध्यान में रखते हुए चुनी हुई सांस्कृतिक क्ल्ब रिपोर्टों को हमारी वेबसाइट पर डालने के उद्देश्य से सांस्कृतिक क्लब की रिपोर्टों का मूल्यांकन किया गया ।

सदस्य स्कूलों हेतु सीसीआरटी की वेबसाइट पर डाली गई सांस्कृतिक क्लब की सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टों को विश्लेषित व अंतिम रूप से चुनने हेतु, वर्ष 2012-13 की श्रेष्ठ सांस्कृतिक क्लब की रिपोर्टों के चयन हेतु एक समिति गठित की गई और वेबसाइट पर श्रेष्ठ पांच चुनी रिपोर्टें डाली गईं ।

2013-14 में फिर से समिति द्वारा श्रेष्ठ रिपोर्टों के चयन हेतु सांस्कृतिक क्लब की रिपोर्टों को विश्लेषित किया गया और इन चुनी गई रिपोर्टों को हमारी वेबसाइट पर कोमल आशा में देखा जा सकता है ।

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चयनित सांस्कृतिक क्लब रिपोर्टं


 
आविष्‍कार सांस्‍कृतिक क्‍लब, महाराष्‍ट्र

प्रभारी: प्रभारी : श्रीमती कविता रमेश पवार

आविष्‍कार सांस्‍कृतिक क्‍लब के सदस्‍यों ने शिल्‍प कार्यशालाओं क्षेत्रीय लोक नृत्‍य प्रतियोगिताओं, आभूषण नमूनों तथा मृत्तिका शिल्‍प अलंकरण आदि के माध्‍यम से भारतीय परम्‍पराओं को समझने का प्रयास किया ।

आओ और सीखने के लिए हाथ मिलाओ ।

 वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट


 
बाल शैलनट कलचरल क्लब, उत्तराखण्ड

प्रभारी: श्रीमती ज्योति गांधी

सकारात्‍मक सोच को ग्रहण करते हुए सृजनशील क्षमता का विकास करने की सीढ़ी पर चढ़ता बाल शैलनट कलचरल क्‍लब है । क्‍लब गीत नियमों की डोर पर चलते हुए नया अपना आकाश बनाने की प्रतिज्ञा दर्शाता है, प्रतिज्ञा समाज के उत्‍थान में सहयोग देने की ओर ले जाती है । तरह-तरह की पुतलियां, डिस्‍पोसेबल गिलास से घंटी, पुराने पाइप से फूलदान, कार्डों से ति‍तली, ऐपण बनाना, परंपरागत त्‍यौहार मनाना, लुप्‍त होती जा रही विधाओं, रीति-रिवाजों, कलाओं, संस्‍कृति से बच्‍चों में जागरुकता प्रगति है क्‍लब की ।

चलिए देखें कैसे ये अपनी दुनिया संजो रहे हैं नियमों की डोर पर नया आकाश बना रहे हैं-

 वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट



 
संस्कार सांस्कृतिक क्लब, हरियाणा

प्रभारी: श्री पवन कुमार

संस्कार क्लब गवर्मेण्ट मिडिल स्कूल प्राणपुरा/गोपालपुरा जिला-रेवाडी हरियाणा जिसमें सब है समाहित वह है- संस्कार क्लब । शपथ से लेकर क्लब गीत, प्रभात फेरी, विविध गतिविधियों का समावेश जैसे पेपर बैग बनाना, मुखौटे बनाना, बेकार सामान से सामग्री, कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत जीवनोपयोगी वस्तुएं, स्वर्ण पदक हासिल करने वाला- ऐसा है संस्कार क्लब । 

 वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट

 




 
कोनार्क सांस्कृतिक क्लब, महाराष्ट्र

प्रभारी: श्री स. वी. रामावत

कोणार्क कलचरल क्लब न्यू हाईस्कूल बेलपुरा, अमरावती महाराष्ट्र वर्ष 2011 से सत्त अग्रणी इस क्लब की उत्साही गतिविधियों का केन्द्र है - पर्यावरण संवर्धन । मिट्टी से निर्मित इको फ्रेंडली गणपति, चेतना जागृत करता पोस्टंर, चॉक शिल्प, मिट्टी का कार्य, कचरे का होली जलाने में उपयोग, प्राकृतिक रंग बनाकर होली खेलने का प्रचार, शिवटेकडी भ्रमण और सीखी कलाओं की प्रदर्शनी-पहचान है इस क्लब की ।

आईए चलें उठाऐं इन गतिविधियों का आनन्द ।

 वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट

 


 
स्वाभिमान, केरल

प्रभारी: श्रीमती नसीमा पी.यू.

इस क्लब-स्वाभिमान का उद्देश्य मोर के एक प्रतीक के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करना तथा नई पीढ़ी को उनसे अवगत कराना है। कच्छ वनस्पति और औषधि-उद्यानों का भ्रमण छात्रों को औषध् संबंधी पौधें को जानने, उन्हें प्रदर्शनी आयोजित करने तथा केरल शिल्प ग्राम की यात्रा करने के लिए प्रेरित करता है। जिससे प्रभावित होकर छात्रा जिल्दसाजी, पेपर शिल्प, फाइल बोर्ड आदि बनाना सीखते हैं। नशा मुक्ति दिवस का आयोजन उल्लेखनीय था। इस दिन नशा करने से संबंधित समस्याओं पर एक रैली निकाली गई और एक कक्षा का भी आयोजन किया गया। इसके अलावा वृध्‍धाश्रम का भी भ्रमण किया गया जो कि एक अच्छा अनुभव रहा।

आओ उनके सुन्दर संसार को देखें जिसके वे स्वाभिमानी सदस्य है।

 

वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट


 


 
ऐरोंगनिंग थाऊ सांस्कृतिक क्लब, मणिपुर

प्रभारी: श्री प्रो. सिंघाजीत सिंह

उत्तर-पूर्वी मणिपुर में ऐरांेगनिंग थाऊ सांस्कृतिक क्लब राष्ट्र की कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के क्षेत्रा में सक्रिय रूप से कार्यरत है। क्लब की कुछ गतिविध्यिां हैं - चित्राकला-प्रदर्शन कक्षा, विशेष स्तरीय प्रतियोगिता, आकाशवाणी इम्पफाल में बच्चों के विभिन्न कार्यक्रम, ऊर्जा संरक्षण पर स्कूल स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभागिता, नृत्य-प्रदर्शन कक्षाएँ, निबन्ध् प्रतियोगिता, पुंग कोलम प्रस्तुति तथा भारत की विश्व स्तरीय विरासत पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित करना आदि।

आओं और देखो, वे मणिपुर की भूमि पर किस प्रकार ये सभी एक साथ करने में सक्षम होते हैं।


 वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट